Krishna Heritage: A Legacy of Devotion

A sacred space celebrating devotion, history, and spiritual connection.

Krishna Heritage

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पवित्र धरोहर

1. खाटू श्याम जी – सीकर (राजस्थान)

कृष्ण का वरदान — “कलीयुग में श्याम रूप में पूजे जाओगे

खाटू श्याम जी को कलीयुग के कृष्ण और भक्तों के शीघ्र कृपास्वरूप कहा जाता है।
श्याम बाबा का संदेश स्पष्ट है:


जो हारा है, वही मेरा है।  हर दुखी, निराश और आश्रित मन को यहाँ आशा का पुनर्जन्म मिलता है।

कथाबारबारिक का त्याग और कृष्ण का आशीर्वाद

बारबारिक (घटोत्कच के पुत्र) के पास अतुलनीय शक्ति थी।  उन्होंने प्रतिज्ञा की कि युद्ध में कमज़ोर पक्ष का साथ देंगे।  कृष्ण ने उनकी दृढ़ता, सत्यवादिता और अपार त्याग देखकर कहा:

बारबारिक, तुम्हारा वीरत्याग अद्वितीय है।  कलीयुग में तुमश्यामनाम से पूजे जाओगे। जिनके पास कोई होगा, तुम उनके सहारा बनोगे।

बारबारिक का शीश आज खाटू में विराजता हैइसीलिए श्याम बाबा कोशीश के दानीभी कहा जाता है।

प्राप्ति / आशीर्वाद

विशेष सेवा सुझाव

 मनोकामनापत्र (Wish Letter) चढ़ाएँ :  केवल एक इच्छा लिखें , मन पूरी तरह निश्छल हो , पत्र चढ़ाते समय बाबा से हृदयसंवाद करें ,  इच्छा पूरी होने पर धन्यवाद दर्शन अवश्य करें , यह सेवा श्याम भक्त पर सीधी कृपाअनुभूति प्रदान करती है।

भक्तों का अनुभव

मंदिर की दहलीज़ पर ही गहरी राहत और मन की हल्कापन , बाबा के दर्शनों में दया और सहारा का अद्भुत भाव , श्याम ध्वज और कीर्तन से पूरे वातावरण में ऊर्जा का संचार ,मनोकामनापत्र चढ़ाते ही भीतर विश्वास और संतोष

यात्रा मार्गदर्शन

  • स्थान: खाटू, ज़िला सीकर, राजस्थान
  • निकटतम स्टेशन: रिंगस जंक्शन (Khatu से लगभग 17 किमी)
  • स्थानीय परिवहन: जीप, टैक्सी, बस
  • विशेष: मेलों में अत्यधिक भीड़पहले से योजना बनाएँ

प्रमुख उत्सव

फाल्गुनी मेला (सबसे प्रसिद्ध) , जन्मोत्सव / प्राकट्य दिवस , एकादशी विशेष दर्शन , श्याम भजन संध्या और जागरण

अनुशंसित मंत्र : “हारे का सहारा — खाटू श्याम हमारा”

भावार्थ (Spiritual Essence)

जहाँ सबने साथ छोड़ा, वहाँ श्याम बाबा ने हाथ थामा।
वे कलीयुग के सच्चे सहाराहार को जीत में बदल देने वाले भगवान हैं।

2. चारभुजा जी मंदिर – गढ़बोर, राजसमंद (राजस्थान)

उत्पत्ति कथाभक्तत्व, बल और करुणा का संगम

चारभुजा जी का यह दिव्य मंदिर राजसमंद जिले के गढ़बोर में स्थित है और इसे मेवाड़ का रणछोड़जी धाम भी कहा जाता है।  कथा के अनुसार, यह विग्रह स्वयं पांडवों के वंशज भीलू राजा गंगूजी को प्राप्त हुआ। भगवान ने अपने चारभुजा स्वरूप में दर्शन देकर यह स्थापित किया किजो भी निष्कपट हृदय से शरण ले, उसे श्रीहरि कभी नहीं छोड़ते।यही कारण है कि यहाँ का वातावरण भक्ति, वीरता, संरक्षण और दैवीय करुणा की ऊर्जा से भरा है।

चारभुजा जी का स्वरूप

चारभुजा जी विष्णुस्वरूप में हैं, जिनके चार हाथों में दैवीय आयुध

  • शंख (पवित्रता आध्यात्मिक शक्ति)
  • चक्र (धर्मरक्षा)
  • गदा (बल, साहस)
  • पद्म (दया, प्रेम, और शांति)

यह संयोजन भक्त को साहस + संरक्षण + प्रेम की त्रिवेणी प्रदान करता है।

प्रमुख महत्त्व व फल

क्या अनुभव करते हैं भक्त?

  • मंदिर परिसर में विशेष शक्ति और संरक्षण की अनुभूति
  • विग्रहदर्शन से आत्मविश्वास और निर्भयता
  • भील परंपरा, मेवाड़ की भक्ति और ग्रामीण संस्कृति का अलौकिक संगम
  • भोग/आरती के समय दिव्य आध्यात्मिक कंपन

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: गढ़बोर गाँव, राजसमंद जिला

निकट शहर: राजसमंद – 28 किमी, नाथद्वारा – 35 किमी, उदयपुर – 90 किमी

निकटतम स्टेशन/एयरपोर्ट:   रेलवे: राजसमंद / मारवाड़ जंक्शन

एयरपोर्ट: उदयपुर (लगभग 95 किमी)

स्थानीय परिवहन: बस, टैक्सी, लोकल जीप

सर्वोत्तम दर्शन समय

सुबह दर्शन: 7:30 AM – 11:30 AM | शाम दर्शन: 4:00 PM – 8:00 PM

भीड़: अमावस्या, पूर्णिमा और त्यौहारों पर अधिक

प्रमुख उत्सव

जन्माष्टमी , रामधुन एवं रथयात्रा उत्सव , अन्नकूट दर्शन , पूर्वज दिवस और भील परंपराओं से जुड़े विशेष पर्व , झूलन उत्सव

अनुशंसित मंत्र : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “श्री चारभुजा भगवान की जय”

3. सेठ सावरिया जी – मंदफिया (चित्तौड़गढ़, राजस्थान)

 जहाँ श्याम स्वयं व्यापारियों के हितैषी बनते हैं

मंदफिया स्थित सावरिया सेठ जी का यह धाम व्यापार, धन, सौदा और आर्थिक संरक्षण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है।  श्याम का यह स्वरूपसेठकहलाता है —  अर्थात वह दिव्य व्यापारी जो हर व्यापारी के सौदे और कर्म की रक्षा करते हैं।

कथास्वयंप्रकट श्याम स्वरूप

कहते हैं यह विग्रह स्वयंप्रकट है और इसकी स्थापना की प्रेरणा नाथद्वारा श्रीनाथजी से जुड़ी है।  सेवा, श्रृंगार और भोग की शैली भी नाथद्वारा परम्परा के समान हैमधुर, भव्य और व्यापारीपरिवार जैसी आत्मीयता से भरी हुई।

भक्तों का विश्वास है कि:

सावरिया सेठ व्यापार में जोखिम को संरक्षण,
और सौदे में उतारचढ़ाव को स्थिरता में बदल देते हैं।

यही कारण है कि देशभर के व्यापारी अपने खाते, बिल, टेंडर, फाइलें और सौदाड्राफ्ट इनके चरणों में रखते हैं।

प्राप्ति / आशीर्वाद

विशेष सेवा सुझाव

व्यापार फ़ाइल / प्रोजेक्ट की प्रति चरणों में स्पर्श कराएँ

व्यापारी अपने:

  • टेंडर
  • सौदा फाइल
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट
  • बिल या नए खाते की प्रति

सावरिया सेठ के चरणों में स्पर्श कराते हैं।

इससे सौदे में शुभ संकेत, क्लाइंट की सकारात्मकता और आर्थिक सुरक्षा की अनुभूति होती है।

भक्तों का अनुभव

मंदिर में प्रवेश करते हीसुरक्षा और विश्वासकी गहरी भावना ,  भव्य श्रृंगार और संगीत से सकारात्मक ऊर्जा ,  व्यापारिक चिंता तुरंत हल्की महसूस होती है , सेठ जी की दृष्टि में रोज़गार और सम्पन्नता की कृपा का अनुभव

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: मंदफिया, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) ,  निकटतम शहर: चित्तौड़गढ़ (30 किमी), नाथद्वारा (60 किमी)

निकट स्टेशन: चित्तौड़गढ़ , विशेष: यह धाम राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित है, यात्रियों के लिए सहज पहुँच

प्रमुख उत्सव

प्रत्येक एकादशी ,  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ,  दीपावली / धनतेरस विशेष पूजन , नववर्ष व्यापारआरंभ पूजन

अनुशंसित मंत्र : “श्री सावरिया सेठ की जय!”

4. श्रीनाथजी मंदिर – नाथद्वारा (राजस्थान)

उत्पत्ति / कथागोवर्धनधारी कृष्ण का स्वयंप्रकट बालस्वरूप श्रीनाथजी वह दिव्य स्वरूप हैं जो गोवर्धन पर्वत से स्वयं प्रकट हुए। उनका यह रूप गोवर्धनधारी बालकृष्ण का हैबाएँ हाथ में उठाया हुआ पर्वत और मासूम, जीवंत बालचरण।


विशेष बात:  यहाँ पूजा नहीं, सेवा होती है। माने भगवान को मातापिता की तरह सँवारा जाता है, जागरण, स्नान, भोजन, शृंगार, खेल, विश्रामसब कुछबालक कृष्णकी दिनचर्या के अनुसार। इसीलिए नाथद्वारा का यह मंदिरहवेलीकहलाता है, जहाँ ठाकुरजी घर के स्वामी हैं और भक्त सेवक।

मंदिर की विशिष्टता

  • श्रीनाथजी का विग्रहजीवंत बालस्वरूपमाना जाता है।  झलकदर्शन के निश्चित समयप्रभु जब चाहते हैं तब ही पर्दा खुलता है। पूरी सेवा पुष्टिमार्ग परंपरा के अनुसारप्रेम, वात्सल्य और मधुरता से भरी।  यहाँ के दर्शन में भक्त अनुभव करते हैं—  आज सचमुच कृष्ण बालक की तरह मेरे सामने हैं।

महत्त्व / आशीर्वाद

भक्तों का अनुभव

झलकदर्शन में दिव्य रोमांच ,  शृंगार के विविध रूपों में जीवंत बालकृष्ण , हवेली की घंटियों वंशी की ध्वनि से गहरी माधुर्यऊर्जा , प्रभु घर में हैंयह भाव अत्यंत प्रबल

दर्शन समय:

श्रीनाथजी के दर्शन दिन में कई बार होते हैं,
लेकिन प्रत्येक केवल कुछ मिनटों की झलक:

  • मंगल
  • श्रंगार
  • राजभोग
  • उत्थापन
  • भोग
  • संध्या
  • शयन

(भक्त समय से पहले पहुँचकर हवेली वातावरण में डूब जाते हैं।)

यात्रा मार्ग

स्थान: नाथद्वारा, उदयपुर से लगभग 45 किमी

निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर (महारााणा प्रताप एयरपोर्ट)

निकटतम स्टेशन: राजसमंद / उदयपुर

स्थानीय परिवहन: टैक्सी, बस, निजी वाहन

निकट दर्शन स्थल: एकलिंगजी , हाल्दीघाटी , नवनीत प्रिया मंदिर

प्रमुख उत्सव

अन्नकूट महोत्सव (दीपावली):   पूरे वर्ष का सबसे भव्य उत्सव अनेक प्रकार के भोग, शृंगार और दिव्य उत्साह।

नंद महोत्सव: कृष्ण जन्म के बाद का अत्यंत मधुर पर्व झाँकियाँ, नृत्य, भोग और उत्सव का अनोखा संगम।

अन्य: गोवर्धन पूजा, फाग महोत्सव (होली), पुष्टिमार्ग के सभी मुख्य उत्सव

अनुशंसित मंत्र : - “श्रीनाथजी प्रभु की जय!” या “जय श्रीकृष्ण–श्रीनाथ”

5. गोविंद देव जी – जयपुर (राजस्थान)

जहाँ साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप के दर्शन होते हैं

जयपुर के हृदय में स्थित गोविंद देव जी का मंदिर राजस्थान का सबसे जीवंत कृष्णधाम माना जाता है।
यहाँ के दर्शन कोसाक्षात जीवंत स्वरूपकहा जाता हैक्योंकि भगवान की प्रतिमा में अद्भुत प्रभा, आकर्षण और तेज अनुभव होता है। राजस्थान के कछवाहा राजवंश ने इन्हें अपना राजदेवता माना,
इसीलिए यह मंदिर राजसी ऐश्वर्य, गरिमा और भक्ति का सुंदर संगम है।

 कथावज्रनाभ द्वारा निर्मित मूल स्वरूप, जो जयपुर तक पहुँचापरंपरा के अनुसारयह विग्रह वज्रनाभ, श्रीकृष्ण के प्रपौत्र द्वारा बनाया गया था, और यह कृष्ण के वास्तविक स्वरूप पर आधारित है।  मुग़ल काल में इनकी सुरक्षा हेतु इन्हें वृंदावन से आमेर, और फिर जयपुर लाया गया। महाराजा सवाई जयसिंह ने शहर का निर्माण इस प्रकार किया कि गोविंद देव जी का दर्शन उनके राजमहल से सीधा हो सके। इसीलिए इन्हें जयपुर के राजदेवता कहा जाता है।

महत्त्व / प्राप्ति

क्या करें (सेवा सुझाव)

श्रीरंग (अलंकृत दर्शनों) के समय शुभ संकल्प लिखकर जेब में रखें।

इससे मनोवांछित कार्यों में:

  • तेजी,
  • सफलता,
  • और सकारात्मक मार्गदर्शन
    का अनुभव होता है।

यह सेवा विशेष रूप से करियर, सरकारी परीक्षाओं, व्यापार, और पदसंबंधित कार्यों में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

भक्तों का अनुभव

हर झाँकी में प्रभु के मुख से जीवंत मुस्कान ,  आरती के समय अद्भुत दिव्यऊर्जा ,  भीड़ के बीच भी अनोखा शांत भाव , राजसी शृंगार और संगीत जो मन को गहराई से छू ले.

यात्रा संकेत

स्थान: सिटी पैलेस परिसर, जयपुर

निकटतम स्टेशन: जयपुर जंक्शन

निकटतम एयरपोर्ट: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा

दर्शन: दिन में कई झाँकियाँ – प्रत्येक झाँकी में भिन्न शृंगार

मुख्य उत्सव

झूलन उत्सव: शृंगार और मधुर कीर्तन का अद्भुत महोत्सव।

जन्माष्टमी: अत्यंत भव्य अलंकार, झाँकियाँ और संपूर्ण राजसी उत्सव।

अन्य: कार्तिक मास, अन्नकूट दर्शन, वसंत पंचमी शृंगार

अनुशंसित मंत्र : “जय जय श्री गोविंद देव”

1. श्री कृष्ण जन्मभूमि – मथुरा (उत्तर प्रदेश)

उत्पत्ति कथाअवतार का पवित्र क्षण

 

मथुरा की इस पावन भूमि पर माता देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। कंस की कारागार में जन्म लेने वाले विग्रह ने संसार को यह संदेश दिया किधर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं।


यह स्थल आज भीअधर्म के नाश, सत्य और न्याय की स्थापना, तथा दैवीय हस्तक्षेप की अनुभूति का सजीव प्रमाण है।  जन्मभूमि परिसर का हर पत्थर भक्तों को भयमुक्त जीवन, धर्मनिष्ठ कर्म, और शुद्ध भक्ति का मार्ग दिखाता है।

प्रमुख महत्त्व व आध्यात्मिक फल

मथुरा की जन्मभूमि पर दर्शन करने से परम्परागत रूप से यह फल प्राप्त होते हैं:

विशेष दर्शन अनुभूतियाँ

  • शांत, दैवीय ऊर्जा जो मन को स्थिर करती है , जन्मभूमि कक्ष में गहन आध्यात्मिक कंपन
  • आरती में सामूहिक भक्ति की तीव्र शक्ति ,  वासुदेवकुटीअनुभूतिजहां भक्त स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित महसूस करते हैं

कैसे पहुँचे

निकट स्टेशन: Mathura Junction – लगभग 2 किमी

निकट हवाई अड्डा: आगरा (AGRA Airport, 60 किमी)

लोकल परिवहन: रिक्शा, ऑटो उपलब्ध

उपयुक्त समय व प्रमुख पर्व

सर्वश्रेष्ठ दर्शन: सुबह 8:00 AM – 11:00 AM
शाम को संध्या आरती

महापर्व: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, लड्डू गोपाल झूला उत्सव

भीड़ से बचने के लिए वीकडेज़ को प्राथमिकता दें

अनुशंसित जप / मंत्र : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

2. बाँके बिहारी मंदिर – वृन्दावन (उत्तर प्रदेश)

उत्पत्ति कथाश्याम और श्यामा का दिव्य साक्षात्कार

वृन्दावन की आनंदतरंगिणी धरा पर, महान भक्त स्वामी हरिदास जी की गहन साधना और नादब्रह्म की तान पर श्यामाश्याम ने स्वयं प्रकट होकरबाँके बिहारी स्वरूप में दर्शन दिए। यहाँ कृष्ण मकरंदमाधुरी के प्रतीक हैंइतने मधुर, इतने मोहितकारी, कि लगातार दर्शन करने पर भक्त समाधिभाव में खो जाए। इसी कारण मंदिर में दर्शन झलकझलक कराए जाते हैंताकि बिहारीजी की अत्यंत माधुर्यपूर्ण छवि में भक्त पूरी तरह तल्लीन हो जाए और लौकिक चेतना बनी रहे। इस स्थान का अभिप्राय ही है: प्रेम में डूबो, पर खोओ मतकृष्ण स्वयं तुम्हें संभालेंगे।

प्रमुख महत्त्व व आध्यात्मिक फल

जिला अनुभव – बिहारीजी दर्शन की विशिष्ट अनुभूति

  • बिहारीजी की मुस्कानभक्त पर प्रेम की वर्षा” , राधाकृष्ण की एकत्व लीला की झलक , दुलार, विनय और हृदयनिष्ठ भक्ति का स्पर्श , वृन्दावन की हवा में बहती राधे राधे की तरंग ,यही वह स्थान है जहाँ भक्त कहते हैंयहाँ दर्शन नहीं होतेबिहारीजी स्वयं बुलाते हैं।

यात्रा मार्गदर्शन

निकट स्टेशन: Mathura Junction / Vrindavan Railway Station

स्थानीय परिवहन: रिक्शा, टेम्पो, तांगे

टिप: छुट्टियों और सप्ताहांत पर भीड़ अधिक रहती है

उपयुक्त दर्शन विशेष झाँकियाँ: सुबह की झाँकी ,  संध्या की झाँकी ,  भीड़ से बचने हेतु सुबह के समय श्रेष्ठ

प्रमुख उत्सव

वृन्दावन की होलीबिहारीजी के रंग

हिंडोला उत्सवझूला झूलते बिहारीजी

शरद पूर्णिमामाधुर्यरस का चरम

(तीनों उत्सवों में मंदिर का वातावरण अत्यंत अलौकिक माना जाता है।)

अनुशंसित मंत्र : “राधे राधे जय श्रीराधे”

3. राधा रमण मंदिर – वृन्दावन (उत्तर प्रदेश)

उत्पत्ति कथाजब शालिग्राम ने स्वयं स्वरूप धारण किया
वृन्दावन के छः गोस्वामियों में से एक श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी की तपस्या, व्रत और अखंड भक्ति से प्रसन्न होकर उनके पूजनीय शालिग्राम शिला ने एक रात्रि स्वयंराधा रमणके रूप में प्रकट होकर दिव्य विग्रह धारण कर लिया।  यह घटना वैष्णव परंपरा में अद्वितीय चमत्कार मानी जाती है—  क्योंकि यह स्वयंप्रकट श्रीकृष्ण विग्रह है, मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं। आज भी भक्त दर्शन करते समय अनुभव करते हैं कि: यह केवल मूर्ति नहींस्वयं रमणस्वरूप श्रीकृष्ण हैं।

धाम की विशिष्टता
राधा रमण जी के विग्रह में त्रिभंग मुद्रा की मनोहर झलक , विग्रह के साथ रखा शालिग्राममूल स्वरूप की स्मृति  ,  500+ वर्षों से अखंडित चल रही महान सेवापरम्परा ,  छोटा, शांत और अत्यधिक आध्यात्मिक स्पंदन वाला मंदिर परिसर

प्रमुख महत्त्व व आध्यात्मिक फल

भक्तों का अनुभव

  • मंदिर में प्रवेश के साथ ही गहरा शांत आध्यात्मिक कम्पन , विग्रह की सूक्ष्म, जीवंत अभिव्यक्ति
  • अत्यंत सरल, विनम्र और परम्परागत आरतीविधि,  सेवायत गोस्वामी परिवार की 500 साल पुरानी व्यवस्था, राधा रमण जी के दर्शन अक्सर यह भाव जगाते हैंईश्वर इतने समीप, इतने जीवंत!”

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: Old Vrindavan (निर्मल संकरे गलियों के बीच)

मंदिर आयु: 500+ वर्ष

पास के धाम: निधिवन, सेवाकुंज, राधा वल्लभ मंदिर

प्रमुख पर्व व उत्सव

ब्रह्मोत्सव
राधा रमण जी के अलौकिक अभिषेक और दिव्य शृंगार का अनुपम उत्सव।

झूला यात्रा (Jhulan Yatra
रमणरसराज श्रीकृष्ण का झूला उत्सववृन्दावन की सबसे मधुर परंपराओं में से एक।

अतिरिक्त पर्व:

  • कृष्ण जन्माष्टमी
  • गोपाल भट्ट गोस्वामी तिरोभाव

अनुशंसित मंत्र : “राधा रमण गोविन्द जय — जय जय श्री राधे”

4. गोकुल – रमन रेटी (उत्तर प्रदेश)

जहाँ कान्हा ने रेत में खेलकर आनंद बरसाया

रमन रेटी का अर्थ हैआनंद की रेत, दिव्यता का खेल

यह वह भूमि है जहाँ बालगोपाल ने अपने नन्हें चरणों से रेत को पवित्र कर दिया।

कथाश्रीकृष्ण के बाललीला की प्रथम धरती

यमुना के उस पार, जहां आज गोकुल स्थित है, वासुदेव जी नवजात श्रीकृष्ण को बदलकर यशोदामैया की गोद में सौंप आए।  यही गोकुल कृष्ण के  – पहले खेल,   पहले कदमपहली मुस्कानऔर पहली माखनलीला की भूमि है।

कथा है कि रमन रेटी की रेत में आज भी दिव्य स्पंदन है, मानो श्रीकृष्ण की बालचपलता और पवित्र आनंद अब भी वहीं बिखरे हों।   भक्त यहाँ आकर अनुभव करते हैं कि—  यहाँ हवा भी गोपाल के बचपन की तरह मासूम लगती है।

प्रमुख महत्त्व / आध्यात्मिक प्राप्ति

भक्तों का अनुभव

  • रेत में बैठते ही मन हल्का और शांत ,  बच्चों जैसा आनंद, सरलता और खुलापन , बालगोपाल की चंचलता की अनुभूति , रेत मेंऊर्जातरंगजैसा दिव्य अनुभव

विशेष सेवा सुझाव

रेत पर लेटकर प्रार्थना”   यह सेवा अहंकारक्षालन और मन को खाली करने का माध्यम मानी जाती है।
शरीर माँ धरती पर और मन बालगोपाल के चरणों मेंयह क्रिया भक्त को गहरी विनम्रता, हृदयशुद्धि और प्रेमऊर्जा से भर देती है।

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: मथुरा से कुछ ही किलोमीटर दूरी

निकट स्टेशन: Mathura Junction

परिवहन: ऑटो, रिक्शा और लोकल जीप

संलग्न धाम: नन्दभवन, ब्रह्मांडघाट, गोपाललाल मंदिर

प्रमुख उत्सव

गोकुल अष्टमी

बलगोपाल झूला उत्सव

ब्रज की होली (गोकुलविशेष)

अनुशंसित मंत्र :- “श्याम सुंदर की जय”

5. नंद भवन – नंदगाँव (उत्तर प्रदेश)

 जहाँ नंदयशोदा के लाल ने अपना शैशव बिताया

यह वही पावन धरा है जहाँ बालकृष्ण के कदमों की छाप आज भी हवा में महसूस होती है। नंदगाँव की पहाड़ी पर स्थित नंद भवन वह स्थान है जहाँ माँ यशोदा ने कान्हा को पाला, सँवारा और उनसे संसार को प्रेम, सरलता और आनंद का संदेश मिला।

कथाबाल लीला का घर, प्रेम का प्रथम विद्यालय

गोकुल में कंस के अत्याचार बढ़ने पर नंद बाबा ने कृष्ण को लेकर नंदगाँव सुरक्षित स्थान पर बसे।

यहीं कान्हा ने अपना बचपन बितायामाखनचोरी , ग्वालबाल संग गाय चराना , बांसुरी की मधुर तान , रासलीला की प्रथम झल , माँ यशोदा की ममतामयी डाँट और दुलार, नंदगाँव वह भूमि है जो ममता, सुरक्षा, आनंद और परिवारप्रेम का पवित्र स्वरूप है।

महत्त्व / आध्यात्मिक प्राप्ति

भक्तों का अनुभव

  • नंदगाँव की पहाड़ी हवा में अपार शांति , नंदयशोदा की ममता का भाव , बचपन और सरलता की ऊर्जा मंदिर के आँगन में ग्वालबाल लीला की अनुभूति , कान्हा की चंचल मुस्कान का सहज दर्शन

विशेष सेवा सुझाव

बच्चों के नाम सेरुईमाखनका भोग
यह भोग बाल गोपाल की विशेष प्रिय सेवा मानी जाती है। भक्त विश्वास करते हैं कि इससेबच्चों की रक्षा, स्वास्थ्य, और उज्ज्वल भविष्य ,  का ईश्वरीय आशीर्वाद मिलता है।

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: नंदगाँव, मथुरा वृंदावन क्षेत्र

विशेषता: Hilltop Temple (ऊँची पहाड़ी पर स्थित)

निकट स्टेशन: Mathura Junction

निकट धाम: बरसाना (मात्र 7–8 किमी), गोकुल, रमन रेटी

प्रमुख उत्सव

नंदोत्सव

कृष्ण जन्म के अगले दिननंदगाँव का प्रमुख उत्सव।

ब्रज की होली (Lathmar Holi के समीपबरसानानंदगाँव की पारंपरिक होली विश्वविख्यात है।

अन्यझूला उत्सव ,  माखनमिश्री भोग उत्सव , कार्तिक मास उत्सव

अनुशंसित मंत्र :- “जय कृष्ण गोविंदा जय गोपालक”

6. मदन मोहन मंदिर – वृन्दावन (उत्तर प्रदेश)

जहाँ मनमोहक प्रभु मन को भी अपने वश में कर लेते हैं

वृन्दावन की पहाड़ी पर स्थित मदन मोहन मंदिर वह स्थान है जहाँ श्रीकृष्ण अपने मदनमोहन स्वरूप में विराजते हैंएक ऐसा रूप जो कामदेव तक को मोहित कर दे, और मन को भटकने से रोककर भक्ति में स्थिर कर दे।

यह धाम मन की चंचलता पर विजय पाने का आध्यात्मिक केन्द्र माना जाता है।

 कथावज्रनाभ द्वारा प्रतिष्ठित दिव्य स्वरूप

वृन्दावन के प्राचीनतम वैष्णव मंदिरों में से एक, यह धाम अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। परम्परा के अनुसारमूल विग्रह वज्रनाभ (श्रीकृष्ण के परनाती) द्वारा प्रतिष्ठित माना जाता है।  यहाँ का स्वरूप मदनमोहन कहलाता है क्योंकि वे मन को मोह लेने वाले अनुपम सौन्दर्य और अद्भुत शांति के प्रतीक हैं।  यह मंदिर सनातन भक्ति धारा और छः गोस्वामी परम्परा से गहरा जुड़ा है।  मदन मोहन जी की स्थिर, शांत और निर्भ्रांत मुद्रा मन को तुरंत 

आत्मवलोकन और आत्मिक अनुशासन की ओर ले जाती है।

महत्त्व / आध्यात्मिक प्राप्ति

भक्तों का अनुभव

  • मदन मोहन पहाड़ी पर हवा में असाधारण शांति ,  मंदिर की प्राचीनता में छिपी दिव्यता , दृष्टी मात्र से मन हल्का, स्थिर और शांत ,  सूर्यास्त समय मंदिर परिसर में गहन आध्यात्मिक कंपन

विशेष सेवा सुझाव

कृष्णनाम लेखन साधना”  मदन मोहन जी के समक्ष बैठकर  108 बारकृष्णलिखना  मन को चमत्कारिक रूप से एकाग्र कर देता है।  इससेमन का भटकाव रुकता है,  विचारशक्ति शुद्ध होती है , ध्यान और जप में गहराई आती है ,  यह साधना विशेष रूप से विद्यार्थी, साधक और मानसिक शांति खोजने वालों के लिए अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती है।

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: वृन्दावन की ऊँची पहाड़ी (Kaliya Ghat के पास)

निकट स्टेशन: Mathura Junction / Vrindavan

मंदिर परिवेश: प्राचीन, शांत और साधना के लिए अनुकूल

आसपास के धाम: गोविंद देव जी मंदिर, राधावल्लभ मंदिर

प्रमुख उत्सव

महाशयन उत्सव

ब्रज की होली

कार्तिक मास दीपदान

झूलन उत्सव (सीमित रूप में)

अनुशंसित मंत्र : “मदन मोहन गोविंदा”

7. बरसाना – श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर), उत्तर प्रदेश

राधा रानी की जन्मभूमिप्रेम का शाश्वत धाम  बरसाना वह पावन धरा है जहाँ श्रीराधा रानी, श्रीकृष्ण की सर्वोच्च प्रिया, ने अवतार लिया।  यह स्थान अनंत प्रेम, करुणा, माधुर्य और समर्पण का प्रतीक हैक्योंकि कृष्णभक्ति राधाभाव के बिना पूर्ण नहीं।

 

उत्पत्ति / लीलाराधा रानी का आनन्दनिकेतन
बरसाना को वरसाना भी कहा जाता हैजिसका अर्थ है ईश्वर का वरदान। ,  पर्वत की चार पहाड़ियों को राधाकृष्ण के चार दशक (चार दिशाओं) से जोड़ा जाता है।  शास्त्रों में वर्णित है कि यहीं से रासलीला, प्रेमऋतु, लाड़प्यार, और मधुरशृंगार की धारा प्रवाहित हुई।  बरसाना की लठमार होली केवल उत्सव नहींयह राधाकृष्ण की हासलीला का अमृत अवशेष है।  यह धाम याद दिलाता है
जहाँ राधा हैं, वहीं कृष्ण का पूर्ण स्वरूप प्रकट होता है।

महत्त्व / आध्यात्मिक प्राप्ति

भक्तों का अनुभव

  • श्रीजी मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए मन में अद्भुत उमंग ,  मंदिर परिसर में माधुर्यरस की प्रबल लहर उच्च पर्वतशिखर से दर्शन करते समय अनोखी शांति ,  जय राधे! जय राधे!” के उद्घोष से पूरा  वातावरण भक्ति से भर जाता है

विशेष सेवा सुझाव

राधेनाम जपमंदिर परिसर में 108 बार , यह साधना हृदय में प्रेम, करुणा और भक्ति की कोमलता स्थापित करती है।  राधा रानी का नाम स्वयं में आत्मशुद्धि का महामंत्र माना गया है।

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: बरसाना, मथुरा जनपद

मंदिर स्थिति: पहाड़ी पर सीढ़ियों का लम्बा मार्ग, परन्तु अत्यंत पवित्र अनुभव

निकट शहर: कोसी कलां, मथुरा

निकट धाम: नंदगाँव, कुसुम सरोवर, राधा कुंड

प्रमुख उत्सव

लठमार होली (विश्वप्रसिद्ध) : राधाकृष्ण की हासलीला पर आधारित यह होली बरसानानंदगाँव की अद्वितीय परंपरा है।

 राधाष्टमी:  राधा रानी का जन्मोत्सवदिव्य शृंगार और मधुर कीर्तन से अनुपम दृश्य।

 झूलन उत्सव : श्रीजी के झूले के दर्शनअत्यंत माधुर्यपूर्ण।

अनुशंसित मंत्र : “राधा रानी की जय!”

8. गिरिराज जी – गोवर्धन (मथुरा, उत्तर प्रदेश)

जहाँ स्वयं गिरिराजश्रीकृष्ण का प्रत्यक्ष स्वरूप हैं  गोवर्धन वह दिव्य भूमि है जहाँ गिरिराज जी स्वयं श्रीकृष्ण के अंगस्वरूप माने जाते हैं।  ब्रज में कहा जाता हैगोवर्धन कृष्ण नहीं, कृष्ण स्वयं गोवर्धन हैं।

यह धाम रक्षा, कृपा, विनम्रता और दिव्य शरणागति की अद्वितीय अनुभूति प्रदान करता है।

कथाइन्द्रगर्व का नाश और शरणागति का संदेश जब इन्द्र ने ब्रजवासियों पर प्रलयकारी वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर पूरा ब्रज सुरक्षित कर दिया। उन्होंने कहागिरिराज मेरी देह हैं; इनकी पूजा ही सच्ची मेरी पूजा है।

यह लीला सिखाती हैशरण में आने वालों की रक्षा निश्चित है। अहंकार का अंत होता है और विनम्रता का शासन। ईश्वर साधारण प्रतीत होने वाली चीज़ों को भी दिव्यता से भर देते हैं।

प्राप्ति / आध्यात्मिक लाभ

भक्तों का अनुभव

  • गिरिराज के चरणों में दिव्य सुरक्षा का भारी अनुभव ,  परिक्रमा के दौरान मन हल्का, शांत और गहरी भक्तिऊर्जा , राधाकुंड और कुसुम सरोवर में माधुर्यरस का विशेष स्पंदन , संध्या समय गोवर्धन की परछाई में अलौकिक दर्शन

विशेष सेवागोवर्धन परिक्रमा

एक परिक्रमाचाहे छोटी ही क्यों होकृपा का अनुभूतिपूर्ण प्रभाव दे जाती है।
परिक्रमा तीन प्रकार की होती है:

  • पूरी परिक्रमा: 21 किमी (दानघाटीमानसी गंगाराधाकुंडकुसुम सरोवर)
  • अर्ध परिक्रमा: मानसी गंगा का परिक्रमा
  • मानस परिक्रमा: मन ही मन संकल्प के साथ, श्रद्धाभक्ति से

भक्त मानते हैं कि हर कदम विघ्नों को काटता है और कृपा को बढ़ाता है

परिक्रमा मार्ग

  • दानघाटी
  • मानसी गंगा
  • गोविंद कुंड
  • राधा कुंड
  • श्याम कुंड
  • कुसुम सरोवर
  • पानीघाटा मार्ग

(पूरी परिक्रमा 5–7 घंटे में सम्पन्न होती है।)

प्रमुख उत्सव

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट उत्सव

कार्तिक मास दीपदान

गिरिराज शयनजागरण उत्सव परिक्रमा मेला

अनुशंसित मंत्र : “गिरिराज धरन की जय!”

भावार्थ

“जिसने गोवर्धन उठाया, वह आज भी हमारे सभी बोझ उठाते हैं।
हर चिंता, हर बाधा, हर भय — गिरिराज के चरणों में हल्के हो जाते हैं।”

1. द्वारकाधीश मंदिर – द्वारका (गुजरात)

जहाँ कृष्ण ने अपना राज्य स्थापित किया — ‘राजाधिराज द्वारकाधीश’  द्वारका वह पावन नगरी है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा से प्रस्थान के बाद अपना राजवंश और शासन स्थापित किया। यहाँ वे राजा नहीं — राजाधिराज, धर्म के संरक्षक और योगेश्वर के रूप में पूजे जाते हैं। द्वारका को स्वर्ग समान नगर” कहा जाता है —जहाँ भक्ति, वैभव, समुद्री शांति और दिव्यता एक साथ अनुभूत होते हैं।

उत्पत्ति / कथा – वज्रनाभ द्वारा प्रतिष्ठित दिव्य स्वरूप

  • श्रीकृष्ण ने यहीं से धर्म, नीति, राजनीति और लोककल्याण का संचालन किया।  परंपरा के अनुसार, वज्रनाभ, जो श्रीकृष्ण के प्रपौत्र थे,  ने भगवान के वास्तविक स्वरूप को ध्यान में रखकर प्रथम विग्रह प्रतिष्ठित किया।
  • द्वारका नगरी समुद्र में डूब गई — लेकिन दिव्य धाम आज भी भक्तों को वही ऊर्जा देता है जैसा महाभारत युग में था।धारणा है कि द्वारका धाम स्वयं मोक्षदायिनी भूमि है — जहाँ दर्शन मात्र से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में शुभफल की प्राप्ति होती है।

महत्त्व / प्राप्ति

भक्तों का अनुभव

मंदिर के शिखर पर ध्वजदर्शन मन को अपार शक्ति देते हैं  ,  समुद्र की लहरों में श्रीकृष्ण की ऊर्जा का स्पंदन ,  गर्भगृह में शांत, तेजस्वी और राजसी श्रीकृष्ण द्वारका की हवाओं में अद्भुत दिव्य विस्तार की अनुभूति

यात्रा संकेत

स्थान: द्वारका नगर, गुजरात

निकट हवाई अड्डा: जामनगर (लगभग 130 किमी), राजकोट (लगभग 225 किमी

रेलवे: द्वारका रेलवे स्टेशन (देश के प्रमुख शहरों से कनेक्टेड)

सड़क मार्ग: जामनगर, ओखा, पोरबंदर, राजकोट से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी

प्रमुख उत्सव

जन्माष्टमी उत्सव (बहुत भव्य)

अन्नकूट

ध्वजारोहण समारोह

होली / फाल्गुन महोत्सव

कार्तिक मास दीपदान

अनुशंसित मंत्र : “जय द्वारकाधीश प्रभु की जय!” या “कृष्णाय वासुदेवाय नमः”

भावार्थ

यह वह धाम है जहाँ कृष्ण केवल भगवान नहीं , धर्मराज, नीतिनियंता और विश्व के मार्गदर्शक बनकर विराजते हैं।

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