Krishna Heritage: A Legacy of Devotion

A sacred space celebrating devotion, history, and spiritual connection.

Krishna Heritage

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पवित्र धरोहर (राजस्थान)

1. खाटू श्याम जी – सीकर (राजस्थान)

कृष्ण का वरदान — “कलीयुग में श्याम रूप में पूजे जाओगे

खाटू श्याम जी को कलीयुग के कृष्ण और भक्तों के शीघ्र कृपास्वरूप कहा जाता है।
श्याम बाबा का संदेश स्पष्ट है:


जो हारा है, वही मेरा है।  हर दुखी, निराश और आश्रित मन को यहाँ आशा का पुनर्जन्म मिलता है।

कथाबारबारिक का त्याग और कृष्ण का आशीर्वाद

बारबारिक (घटोत्कच के पुत्र) के पास अतुलनीय शक्ति थी।  उन्होंने प्रतिज्ञा की कि युद्ध में कमज़ोर पक्ष का साथ देंगे।  कृष्ण ने उनकी दृढ़ता, सत्यवादिता और अपार त्याग देखकर कहा:

बारबारिक, तुम्हारा वीरत्याग अद्वितीय है।  कलीयुग में तुमश्यामनाम से पूजे जाओगे। जिनके पास कोई होगा, तुम उनके सहारा बनोगे।

बारबारिक का शीश आज खाटू में विराजता हैइसीलिए श्याम बाबा कोशीश के दानीभी कहा जाता है।

प्राप्ति / आशीर्वाद

विशेष सेवा सुझाव

 मनोकामनापत्र (Wish Letter) चढ़ाएँ :  केवल एक इच्छा लिखें , मन पूरी तरह निश्छल हो , पत्र चढ़ाते समय बाबा से हृदयसंवाद करें ,  इच्छा पूरी होने पर धन्यवाद दर्शन अवश्य करें , यह सेवा श्याम भक्त पर सीधी कृपाअनुभूति प्रदान करती है।

भक्तों का अनुभव

मंदिर की दहलीज़ पर ही गहरी राहत और मन की हल्कापन , बाबा के दर्शनों में दया और सहारा का अद्भुत भाव , श्याम ध्वज और कीर्तन से पूरे वातावरण में ऊर्जा का संचार ,मनोकामनापत्र चढ़ाते ही भीतर विश्वास और संतोष

यात्रा मार्गदर्शन

  • स्थान: खाटू, ज़िला सीकर, राजस्थान
  • निकटतम स्टेशन: रिंगस जंक्शन (Khatu से लगभग 17 किमी)
  • स्थानीय परिवहन: जीप, टैक्सी, बस
  • विशेष: मेलों में अत्यधिक भीड़पहले से योजना बनाएँ

प्रमुख उत्सव

फाल्गुनी मेला (सबसे प्रसिद्ध) , जन्मोत्सव / प्राकट्य दिवस , एकादशी विशेष दर्शन , श्याम भजन संध्या और जागरण

अनुशंसित मंत्र : “हारे का सहारा — खाटू श्याम हमारा”

भावार्थ (Spiritual Essence)

जहाँ सबने साथ छोड़ा, वहाँ श्याम बाबा ने हाथ थामा।
वे कलीयुग के सच्चे सहाराहार को जीत में बदल देने वाले भगवान हैं।

2. चारभुजा जी मंदिर – गढ़बोर, राजसमंद (राजस्थान)

उत्पत्ति कथाभक्तत्व, बल और करुणा का संगम

चारभुजा जी का यह दिव्य मंदिर राजसमंद जिले के गढ़बोर में स्थित है और इसे मेवाड़ का रणछोड़जी धाम भी कहा जाता है।  कथा के अनुसार, यह विग्रह स्वयं पांडवों के वंशज भीलू राजा गंगूजी को प्राप्त हुआ। भगवान ने अपने चारभुजा स्वरूप में दर्शन देकर यह स्थापित किया किजो भी निष्कपट हृदय से शरण ले, उसे श्रीहरि कभी नहीं छोड़ते।यही कारण है कि यहाँ का वातावरण भक्ति, वीरता, संरक्षण और दैवीय करुणा की ऊर्जा से भरा है।

चारभुजा जी का स्वरूप

चारभुजा जी विष्णुस्वरूप में हैं, जिनके चार हाथों में दैवीय आयुध

  • शंख (पवित्रता आध्यात्मिक शक्ति)
  • चक्र (धर्मरक्षा)
  • गदा (बल, साहस)
  • पद्म (दया, प्रेम, और शांति)

यह संयोजन भक्त को साहस + संरक्षण + प्रेम की त्रिवेणी प्रदान करता है।

प्रमुख महत्त्व व फल

क्या अनुभव करते हैं भक्त?

  • मंदिर परिसर में विशेष शक्ति और संरक्षण की अनुभूति
  • विग्रहदर्शन से आत्मविश्वास और निर्भयता
  • भील परंपरा, मेवाड़ की भक्ति और ग्रामीण संस्कृति का अलौकिक संगम
  • भोग/आरती के समय दिव्य आध्यात्मिक कंपन

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: गढ़बोर गाँव, राजसमंद जिला

निकट शहर: राजसमंद – 28 किमी, नाथद्वारा – 35 किमी, उदयपुर – 90 किमी

निकटतम स्टेशन/रेलवे: राजसमंद / मारवाड़ जंक्शन

एयरपोर्ट: उदयपुर (लगभग 95 किमी)

स्थानीय परिवहन: बस, टैक्सी, लोकल जीप

सर्वोत्तम दर्शन समय

सुबह दर्शन: 7:30 AM – 11:30 AM | शाम दर्शन: 4:00 PM – 8:00 PM

भीड़: अमावस्या, पूर्णिमा और त्यौहारों पर अधिक

प्रमुख उत्सव

जन्माष्टमी , रामधुन एवं रथयात्रा उत्सव , अन्नकूट दर्शन , पूर्वज दिवस और भील परंपराओं से जुड़े विशेष पर्व , झूलन उत्सव

अनुशंसित मंत्र : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “श्री चारभुजा भगवान की जय”

3. सेठ सावरिया जी – मंदफिया (चित्तौड़गढ़, राजस्थान)

 जहाँ श्याम स्वयं व्यापारियों के हितैषी बनते हैं

मंदफिया स्थित सावरिया सेठ जी का यह धाम व्यापार, धन, सौदा और आर्थिक संरक्षण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है।  श्याम का यह स्वरूपसेठकहलाता है —  अर्थात वह दिव्य व्यापारी जो हर व्यापारी के सौदे और कर्म की रक्षा करते हैं।

कथास्वयंप्रकट श्याम स्वरूप

कहते हैं यह विग्रह स्वयंप्रकट है और इसकी स्थापना की प्रेरणा नाथद्वारा श्रीनाथजी से जुड़ी है।  सेवा, श्रृंगार और भोग की शैली भी नाथद्वारा परम्परा के समान हैमधुर, भव्य और व्यापारीपरिवार जैसी आत्मीयता से भरी हुई।

भक्तों का विश्वास है कि:

सावरिया सेठ व्यापार में जोखिम को संरक्षण,
और सौदे में उतारचढ़ाव को स्थिरता में बदल देते हैं।

यही कारण है कि देशभर के व्यापारी अपने खाते, बिल, टेंडर, फाइलें और सौदाड्राफ्ट इनके चरणों में रखते हैं।

प्राप्ति / आशीर्वाद

विशेष सेवा सुझाव

व्यापार फ़ाइल / प्रोजेक्ट की प्रति चरणों में स्पर्श कराएँ

व्यापारी अपने:

  • टेंडर
  • सौदा फाइल
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट
  • बिल या नए खाते की प्रति

सावरिया सेठ के चरणों में स्पर्श कराते हैं।

इससे सौदे में शुभ संकेत, क्लाइंट की सकारात्मकता और आर्थिक सुरक्षा की अनुभूति होती है।

भक्तों का अनुभव

मंदिर में प्रवेश करते हीसुरक्षा और विश्वासकी गहरी भावना ,  भव्य श्रृंगार और संगीत से सकारात्मक ऊर्जा ,  व्यापारिक चिंता तुरंत हल्की महसूस होती है , सेठ जी की दृष्टि में रोज़गार और सम्पन्नता की कृपा का अनुभव

यात्रा मार्गदर्शन

स्थान: मंदफिया, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) ,  निकटतम शहर: चित्तौड़गढ़ (30 किमी), नाथद्वारा (60 किमी)

निकट स्टेशन: चित्तौड़गढ़ , विशेष: यह धाम राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित है, यात्रियों के लिए सहज पहुँच

प्रमुख उत्सव

प्रत्येक एकादशी ,  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ,  दीपावली / धनतेरस विशेष पूजन , नववर्ष व्यापारआरंभ पूजन

अनुशंसित मंत्र : “श्री सावरिया सेठ की जय!”

4. श्रीनाथजी मंदिर – नाथद्वारा (राजस्थान)

उत्पत्ति / कथागोवर्धनधारी कृष्ण का स्वयंप्रकट बालस्वरूप श्रीनाथजी वह दिव्य स्वरूप हैं जो गोवर्धन पर्वत से स्वयं प्रकट हुए। उनका यह रूप गोवर्धनधारी बालकृष्ण का हैबाएँ हाथ में उठाया हुआ पर्वत और मासूम, जीवंत बालचरण।


विशेष बात:  यहाँ पूजा नहीं, सेवा होती है। माने भगवान को मातापिता की तरह सँवारा जाता है, जागरण, स्नान, भोजन, शृंगार, खेल, विश्रामसब कुछबालक कृष्णकी दिनचर्या के अनुसार। इसीलिए नाथद्वारा का यह मंदिरहवेलीकहलाता है, जहाँ ठाकुरजी घर के स्वामी हैं और भक्त सेवक।

मंदिर की विशिष्टता

  • श्रीनाथजी का विग्रहजीवंत बालस्वरूपमाना जाता है।  झलकदर्शन के निश्चित समयप्रभु जब चाहते हैं तब ही पर्दा खुलता है। पूरी सेवा पुष्टिमार्ग परंपरा के अनुसारप्रेम, वात्सल्य और मधुरता से भरी।  यहाँ के दर्शन में भक्त अनुभव करते हैं—  आज सचमुच कृष्ण बालक की तरह मेरे सामने हैं।

महत्त्व / आशीर्वाद

भक्तों का अनुभव

झलकदर्शन में दिव्य रोमांच ,  शृंगार के विविध रूपों में जीवंत बालकृष्ण , हवेली की घंटियों वंशी की ध्वनि से गहरी माधुर्यऊर्जा , प्रभु घर में हैंयह भाव अत्यंत प्रबल

दर्शन समय:

श्रीनाथजी के दर्शन दिन में कई बार होते हैं,
लेकिन प्रत्येक केवल कुछ मिनटों की झलक:

  • मंगल
  • श्रंगार
  • राजभोग
  • उत्थापन
  • भोग
  • संध्या
  • शयन

(भक्त समय से पहले पहुँचकर हवेली वातावरण में डूब जाते हैं।)

यात्रा मार्ग

स्थान: नाथद्वारा, उदयपुर से लगभग 45 किमी

निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर (महारााणा प्रताप एयरपोर्ट)

निकटतम स्टेशन: राजसमंद / उदयपुर

स्थानीय परिवहन: टैक्सी, बस, निजी वाहन

निकट दर्शन स्थल: एकलिंगजी , हाल्दीघाटी , नवनीत प्रिया मंदिर

प्रमुख उत्सव

अन्नकूट महोत्सव (दीपावली):   पूरे वर्ष का सबसे भव्य उत्सव अनेक प्रकार के भोग, शृंगार और दिव्य उत्साह।

नंद महोत्सव: कृष्ण जन्म के बाद का अत्यंत मधुर पर्व झाँकियाँ, नृत्य, भोग और उत्सव का अनोखा संगम।

अन्य: गोवर्धन पूजा, फाग महोत्सव (होली), पुष्टिमार्ग के सभी मुख्य उत्सव

अनुशंसित मंत्र : - “श्रीनाथजी प्रभु की जय!” या “जय श्रीकृष्ण–श्रीनाथ”

5. गोविंद देव जी – जयपुर (राजस्थान)

जहाँ साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप के दर्शन होते हैं

जयपुर के हृदय में स्थित गोविंद देव जी का मंदिर राजस्थान का सबसे जीवंत कृष्णधाम माना जाता है।
यहाँ के दर्शन कोसाक्षात जीवंत स्वरूपकहा जाता हैक्योंकि भगवान की प्रतिमा में अद्भुत प्रभा, आकर्षण और तेज अनुभव होता है। राजस्थान के कछवाहा राजवंश ने इन्हें अपना राजदेवता माना,
इसीलिए यह मंदिर राजसी ऐश्वर्य, गरिमा और भक्ति का सुंदर संगम है।

 कथावज्रनाभ द्वारा निर्मित मूल स्वरूप, जो जयपुर तक पहुँचापरंपरा के अनुसारयह विग्रह वज्रनाभ, श्रीकृष्ण के प्रपौत्र द्वारा बनाया गया था, और यह कृष्ण के वास्तविक स्वरूप पर आधारित है।  मुग़ल काल में इनकी सुरक्षा हेतु इन्हें वृंदावन से आमेर, और फिर जयपुर लाया गया। महाराजा सवाई जयसिंह ने शहर का निर्माण इस प्रकार किया कि गोविंद देव जी का दर्शन उनके राजमहल से सीधा हो सके। इसीलिए इन्हें जयपुर के राजदेवता कहा जाता है।

महत्त्व / प्राप्ति

क्या करें (सेवा सुझाव)

श्रीरंग (अलंकृत दर्शनों) के समय शुभ संकल्प लिखकर जेब में रखें।

इससे मनोवांछित कार्यों में:

  • तेजी,
  • सफलता,
  • और सकारात्मक मार्गदर्शन
    का अनुभव होता है।

यह सेवा विशेष रूप से करियर, सरकारी परीक्षाओं, व्यापार, और पदसंबंधित कार्यों में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

भक्तों का अनुभव

हर झाँकी में प्रभु के मुख से जीवंत मुस्कान ,  आरती के समय अद्भुत दिव्यऊर्जा ,  भीड़ के बीच भी अनोखा शांत भाव , राजसी शृंगार और संगीत जो मन को गहराई से छू ले.

यात्रा संकेत

स्थान: सिटी पैलेस परिसर, जयपुर

निकटतम स्टेशन: जयपुर जंक्शन

निकटतम एयरपोर्ट: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा

दर्शन: दिन में कई झाँकियाँ – प्रत्येक झाँकी में भिन्न शृंगार

मुख्य उत्सव

झूलन उत्सव: शृंगार और मधुर कीर्तन का अद्भुत महोत्सव।

जन्माष्टमी: अत्यंत भव्य अलंकार, झाँकियाँ और संपूर्ण राजसी उत्सव।

अन्य: कार्तिक मास, अन्नकूट दर्शन, वसंत पंचमी शृंगार

अनुशंसित मंत्र : “जय जय श्री गोविंद देव”

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